RTE Admission Rule – अगर आप हरियाणा राज्य में रहते हैं और आपके बच्चे की उम्र स्कूल जाने की हो चुकी है, लेकिन आप प्राइवेट स्कूल की मोटी फीस भरने में सक्षम नहीं हैं, तो आपके लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है। हरियाणा सरकार ने अब प्राइवेट स्कूलों में गरीब बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित कर दी हैं, जिससे अब आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे भी बड़ी-बड़ी अंग्रेजी स्कूलों में पढ़ सकेंगे – वो भी बिल्कुल मुफ्त।
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- क्या है RTE कानून और इसका मतलब?
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- शिक्षा मंत्री ने खुद की घोषणा – अब लापरवाही नहीं चलेगी
- डिजिटल तरीके से होगा आवेदन – ‘उज्ज्वल पोर्टल’ से भरें फॉर्म
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- कब और कैसे करें आवेदन?
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- स्कूलों की जिम्मेदारी बढ़ी, नियम तोड़ा तो होगी सख्त कार्रवाई
- स्कूल कितनी दूरी पर हो सकता है?
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- क्या है सरकार की मंशा इस कदम के पीछे?
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क्या है RTE कानून और इसका मतलब?
सबसे पहले ये समझ लीजिए कि RTE यानी “Right to Education” यानी शिक्षा का अधिकार। यह कानून 2009 में पूरे देश में लागू किया गया था। इसके तहत हर प्राइवेट स्कूल को पहली कक्षा और नर्सरी जैसी कक्षाओं में 25 प्रतिशत सीटें गरीब और वंचित बच्चों के लिए रिज़र्व रखनी होती हैं।
हरियाणा सरकार ने अब इस कानून को सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया है और सभी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को आदेश दे दिया है कि वो इस नियम का पालन करें वरना उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
शिक्षा मंत्री ने खुद की घोषणा – अब लापरवाही नहीं चलेगी
हरियाणा के शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा ने हाल ही में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके साफ-साफ कह दिया कि अब प्राइवेट स्कूलों की मनमानी नहीं चलेगी। उन्होंने कहा कि अगर कोई स्कूल RTE के नियमों का पालन नहीं करता है, तो उसकी मान्यता रद्द कर दी जाएगी या उस पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
डिजिटल तरीके से होगा आवेदन – ‘उज्ज्वल पोर्टल’ से भरें फॉर्म
इस बार सरकार ने आवेदन प्रक्रिया को और भी पारदर्शी और आसान बना दिया है। अब आप अपने बच्चे के दाखिले के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं उज्ज्वल पोर्टल के जरिए। इस पोर्टल को खास इसी उद्देश्य से शुरू किया गया है ताकि EWS यानी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चे निजी स्कूलों में भी पढ़ सकें।
यह पोर्टल सभी जिले के लिए ओपन रहेगा और दाखिला पूरी तरह पारदर्शिता के साथ किया जाएगा।
अब सवाल उठता है कि कौन-कौन इस योजना के तहत फ्री शिक्षा पाने के योग्य है। तो चलिए लिस्ट देख लेते हैं:
- BPL (गरीबी रेखा से नीचे) कार्डधारक परिवारों के बच्चे
- HIV संक्रमित बच्चे या जिनके माता-पिता संक्रमित हों
- दिव्यांग यानी विशेष ज़रूरत वाले बच्चे
- शहीदों या विधवाओं के बच्चे
- अनाथ बच्चे या जिनके माता-पिता नहीं हैं
इन सभी बच्चों को कक्षा 1 या प्री-प्राइमरी क्लास में दाखिला मिलेगा, और स्कूल कोई फीस नहीं ले पाएंगे।
कब और कैसे करें आवेदन?
सरकार ने दाखिले की पूरी टाइमलाइन भी जारी कर दी है:
- ऑनलाइन आवेदन शुरू: 15 अप्रैल 2025
- आवेदन की आखिरी तारीख: 21 अप्रैल 2025
- ड्रॉ की तारीख (यदि आवेदन ज्यादा हो): अप्रैल का तीसरा सप्ताह
- दाखिले की आखिरी तारीख: 25 अप्रैल 2025
ड्रॉ पूरी तरह से जिला स्तर पर और अभिभावकों की उपस्थिति में निकाला जाएगा ताकि कोई गड़बड़ी न हो।
स्कूलों की जिम्मेदारी बढ़ी, नियम तोड़ा तो होगी सख्त कार्रवाई
सरकार ने साफ कर दिया है कि इस बार नियम तोड़ने पर कोई ढील नहीं दी जाएगी। यदि कोई स्कूल 25 प्रतिशत सीटों पर आरक्षित बच्चों को दाखिला नहीं देता, तो उसकी मान्यता रद्द हो सकती है या कानूनी कार्यवाही हो सकती है। ऐसे में सभी स्कूलों को अलर्ट कर दिया गया है कि वो समय पर पोर्टल पर आवेदन की प्रक्रिया को पूरा करें और सरकार को दाखिला रिपोर्ट दें।
स्कूल कितनी दूरी पर हो सकता है?
आपके बच्चे को उन्हीं स्कूलों में दाखिले का मौका मिलेगा जो आपके घर से 1 किलोमीटर के दायरे में स्थित हैं। इसका मकसद यह है कि छोटे बच्चों को दूर-दूर तक सफर न करना पड़े।
क्या है सरकार की मंशा इस कदम के पीछे?
सरकार का साफ उद्देश्य है – “हर बच्चा पढ़े, चाहे वह किसी भी तबके से आता हो।” गरीब परिवारों के बच्चों को अच्छे स्कूलों में शिक्षा मिलेगी, तो न केवल उनका भविष्य सुधरेगा बल्कि समाज में समानता और बराबरी का माहौल बनेगा।
अब वो वक्त नहीं रहा जब गरीब बच्चों को बड़े स्कूलों के गेट पर भी खड़े होने नहीं दिया जाता था। RTE कानून और हरियाणा सरकार की सख्ती ने ये मुमकिन कर दिखाया है कि अब हर बच्चा, चाहे किसी भी आर्थिक या सामाजिक स्थिति में हो, बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पा सकेगा।
अगर आप इस नियम के तहत आते हैं, तो बिना देरी के आवेदन करें और अपने बच्चे को वो हक दिलाएं जिसका वो हकदार है।











